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एमपुमलांगा के नए अस्पताल ने विदेशी नागरिकों के स्वास्थ्य देखभाल भुगतान पर बहस छेड़ी

एमपुमलांगा के नए किंग न्याबेला अस्पताल के उद्घाटन के साथ विदेशी नागरिकों के इलाज का खर्च उठाने का मुद्दा फिर गरमा गया है। प्रांतीय सरकार विदेशी सरकारों से इलाज की लागत वसूलने की कोशिश कर रही है।

मुख्य तथ्य

अस्पताल
किंग न्याबेला अस्पताल, मिडलबर्ग, एमपुमलांगा
बिस्तरों की संख्या
220
उद्घाटन
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा द्वारा आधिकारिक उद्घाटन
मुख्य मांग
विदेशी सरकारों से इलाज की लागत वसूली
प्रीमियर
मंडला नडलोवु

पृष्ठभूमि

दक्षिण अफ्रीका के एमपुमलांगा प्रांत में नए किंग न्याबेला अस्पताल के उद्घाटन के साथ ही विदेशी नागरिकों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के भुगतान को लेकर बहस फिर से शुरू हो गई है। प्रांतीय सरकार का कहना है कि विदेशी मरीजों के इलाज की लागत पहले से ही दबाव में चल रही सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

सरकार अब चाहती है कि विदेशी सरकारें अपने नागरिकों को सरकारी सुविधाओं में दी जाने वाली देखभाल की लागत दक्षिण अफ्रीका को वापस चुकाएं। यह मुद्दा राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा द्वारा मिडलबर्ग में 220 बिस्तरों वाले नए किंग न्याबेला अस्पताल के आधिकारिक उद्घाटन के दौरान सामने आया।

वर्तमान स्थिति

एमपुमलांगा के प्रीमियर मंडला नडलोवु ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से किसी को भी मना नहीं किया जाता है, लेकिन विदेशी नागरिकों के इलाज की बढ़ती लागत को अकेले दक्षिण अफ्रीका द्वारा वहन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों के मूल देशों से उन लागतों को वसूलने के तरीकों की तलाश कर रही है।

नडलोवु ने कहा, "हमारी सुविधाओं का उपयोग करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए यह मुफ्त नहीं होना चाहिए। हमें अपने पैसे उनके गृह देशों से वसूलने चाहिए। इसलिए, यह एक चुनौती है जिससे हमें निपटना होगा, लेकिन हमें अपने अधिकारियों को ज्ञान से भी लैस करना होगा ताकि वे पैसा वसूल कर सकें।"

प्रभाव

नडलोवु ने कहा कि इन लागतों की वसूली से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि मरीजों को आवश्यक देखभाल मिलती रहे। इस कदम का सीधा असर विदेशी नागरिकों पर पड़ सकता है, जिन्हें अब अपने इलाज के लिए भुगतान करना पड़ सकता है या उनके देशों को दक्षिण अफ्रीका को प्रतिपूर्ति करनी होगी।

दक्षिण अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर पहले से ही भारी दबाव है, और विदेशी मरीजों के इलाज की लागत को वसूलने से संसाधनों को अन्य क्षेत्रों में पुनर्निर्देशित किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह नीति कब लागू होगी और किन देशों के साथ समझौते होंगे।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि सरकार विदेशी सरकारों के साथ द्विपक्षीय समझौते करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में विदेशी मरीजों के इलाज की लागत वसूली शुरू हो सकती है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में अतिरिक्त राजस्व आ सकता है, लेकिन इसके लिए कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी।

वैकल्पिक रूप से, यदि समझौते नहीं हो पाते हैं, तो विदेशी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित हो सकती है या उन्हें सीधे भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार किस दिशा में आगे बढ़ेगी, और इस मामले पर और जानकारी का इंतजार है।

स्रोत: ewn.co.za

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