मुख्य तथ्य
- संधि का नाम
- गंगा जल साझा संधि
- हस्ताक्षर तिथि
- 12 दिसंबर 1996
- समाप्ति तिथि
- दिसंबर 2026
- साझा नदियाँ
- 54
- द्विपक्षीय तंत्र
- संयुक्त नदी आयोग
- वक्तव्य
- MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
पृष्ठभूमि
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल साझा करने की संधि 12 दिसंबर 1996 को हस्ताक्षरित हुई थी और यह दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। यह संधि दोनों देशों के बीच जल-साझा करने के मुद्दों को नियंत्रित करती है।
जल-साझा करना भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है, जिसमें तीस्ता नदी भी प्रमुखता से शामिल है। तीस्ता पर प्रस्तावित जल-साझा समझौते पर तत्कालीन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण हस्ताक्षर नहीं हो सके थे।
वर्तमान स्थिति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियाँ साझा हैं और जल मुद्दों पर चर्चा के लिए कई तकनीकी स्तर के ढाँचे मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि गंगा जल संधि पर कोई भी चर्चा मौजूदा द्विपक्षीय तंत्र के हिस्से के रूप में होगी।
जायसवाल की टिप्पणी एक संसदीय पैनल के आग्रह के बाद आई है, जिसने सरकार से इस साल के अंत में संधि की समाप्ति से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। इससे पहले 2 जून को भी भारत ने कहा था कि गंगा जल संधि से संबंधित मुद्दों की जाँच मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से की जाएगी।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक प्रवक्ता की टिप्पणी के जवाब में, जिसमें कहा गया था कि ढाका के नई दिल्ली के साथ संबंध एक नए गंगा जल समझौते पर निर्भर हैं, जायसवाल ने दोनों देशों के बीच स्थापित संस्थागत ढाँचे पर जोर दिया था।
| विवरण | मान |
|---|---|
| हस्ताक्षर तिथि | 12 दिसंबर 1996 |
| समाप्ति तिथि | दिसंबर 2026 |
| साझा नदियों की संख्या | 54 |
| द्विपक्षीय तंत्र | संयुक्त नदी आयोग |
प्रभाव
गंगा जल संधि का नवीनीकरण भारत और बांग्लादेश के बीच जल-साझा करने के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। यदि संधि का नवीनीकरण नहीं होता है, तो दोनों देशों के बीच जल-बंटवारे को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे कृषि, पेयजल आपूर्ति और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
इस मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से होने से दोनों देशों के बीच स्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन अगर बातचीत में देरी होती है, तो इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। बांग्लादेश में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि दोनों देश मौजूदा द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से बातचीत जारी रखते हैं, तो संधि के नवीनीकरण पर सहमति बनने की संभावना है। हालाँकि, यदि तीस्ता जैसे अन्य मुद्दों को भी शामिल किया जाता है, तो बातचीत में जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।
यदि संधि का नवीनीकरण समय पर नहीं होता है, तो दोनों देशों के बीच जल-साझा करने के मुद्दे पर तनाव बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि नवीनीकरण की प्रक्रिया कब शुरू होगी और किन शर्तों पर सहमति बनेगी।
स्रोत: malaysiasun.com



