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पाक सेना के 'काफिर' वाले बयान पर पूर्व राजदूत का सवाल: अमेरिका और चीन से दोस्ती कैसे समझाएंगे?

पूर्व राजदूत डिंकर पी श्रीवास्तव ने पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता के काफिर वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह व्याख्या सही है तो पाकिस्तान की अमेरिका और चीन से दोस्ती को कैसे समझा जाए।

नई दिल्ली, 4 अगस्त (एएनआई)। ईरान में भारत के पूर्व राजदूत डिंकर पी श्रीवास्तव ने पाकिस्तानी सेना द्वारा भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर टिप्पणी करते हुए धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि इस्लामाबाद अपने अमेरिका और चीन के साथ लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को कैसे समझाता है।

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने हाल ही में एक कुरान की आयत का हवाला देते हुए कहा था कि जो मुसलमान काफिरों से दोस्ती करते हैं, वे मुसलमान नहीं रहते। श्रीवास्तव ने कहा, 'डीजी आईएसपीआर ने कुरान की आयत का हवाला देकर दावा किया कि जो गैर-मुसलमानों से दोस्ती रखते हैं, वे सच्चे मुसलमान नहीं हैं। यह उनकी व्याख्या है। आप पाकिस्तान की अमेरिका और चीन से दोस्ती को कैसे समझाते हैं?'

श्रीवास्तव ने कहा कि पाकिस्तान शुरू से ब्रिटिश और फिर अमेरिकी संरक्षण में रहा है, और पिछले 30-40 सालों से वह चीन का सहयोगी रहा है, जो एक साम्यवादी देश है। उन्होंने सवाल किया, 'क्या इससे पाकिस्तानी सेना गैर-मुस्लिम हो जाती है?'

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों पर श्रीवास्तव ने कहा कि अफगानिस्तान ने 1947 में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की सदस्यता का विरोध किया था, और यह विरोध दाउद खान, साम्यवादी सरकार और अब तालिबान सरकार के समय भी जारी रहा। उन्होंने कहा, 'इसका कारण यह है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को अपना उपनिवेश माना है, जिससे स्वाभाविक रूप से नाराजगी पैदा हुई है।'

पूर्व राजनयिक वीणा सिकरी ने भी पाकिस्तान की अफगानिस्तान नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान को अपने पड़ोस की बदलती गतिशीलता की समझ नहीं है। वे नहीं समझते कि तालिबान क्या चाहता है और क्या प्रतिनिधित्व करता है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान को आपस में बात करनी चाहिए और भारत को अपनी विफलता के लिए दोष देना बंद करना चाहिए।'

स्रोत: bignewsnetwork.com

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