मुख्य तथ्य
- सफलता दर
- 99.09 प्रतिशत
- पहचाने गए गैर-साक्षर
- 1,80,317
- उत्तीर्ण शिक्षार्थी
- 1,78,680
- पूर्ण साक्षर क्षेत्रों में स्थान
- दसवां
- पूर्ण साक्षरता मानदंड
- 95 प्रतिशत या अधिक
पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर ने केंद्र की 'अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी' (ULLAS) योजना के तहत पूर्ण साक्षर क्षेत्रों की सूची में शामिल होकर शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह योजना, जिसे नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के रूप में भी जाना जाता है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है।
इसका उद्देश्य उन लोगों को साक्षरता के अवसर प्रदान करना है जिन्होंने औपचारिक स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की है और जिनकी आयु 15 वर्ष या उससे अधिक है। किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को 95 प्रतिशत या उससे अधिक साक्षरता दर प्राप्त करने पर पूर्ण साक्षर माना जाता है, क्योंकि उन्नत आयु और बौद्धिक क्षमताओं जैसे कारकों के कारण पूर्ण साक्षरता अव्यावहारिक मानी जाती है।
वर्तमान स्थिति
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश ने राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत आवश्यक साक्षरता मानदंड को सफलतापूर्वक पूरा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ने ULLAS के तहत 99.09 प्रतिशत सफलता दर दर्ज की है, जो इसे देश का सबसे बड़ा जनसंख्या वाला क्षेत्र बनाती है जिसे पूर्ण साक्षर घोषित किया गया है।
केंद्र शासित प्रदेश में कुल 1,80,317 गैर-साक्षरों की पहचान की गई थी। इनमें से 1,78,680 शिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक परीक्षा उत्तीर्ण की, जिसके परिणामस्वरूप समग्र सफलता दर 99.09 प्रतिशत रही। इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर ULLAS पहल के तहत पूर्ण साक्षरता का दर्जा हासिल करने वाला दसवां राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। इससे पहले लद्दाख, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सिक्किम और उत्तराखंड यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
प्रभाव
इस उपलब्धि से आने वाले वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश भर में वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद है। शिक्षकों, प्रशासकों और सभी हितधारकों को बधाई देते हुए उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि शिक्षा सशक्तिकरण का सबसे मजबूत बल बनी हुई है और मिशन को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।
यह उपलब्धि उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे, क्योंकि ULLAS योजना उन्हें साक्षरता का अवसर प्रदान करती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस उपलब्धि का विभिन्न आयु समूहों या सामाजिक वर्गों पर क्या विशिष्ट प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि आधिकारिक आंकड़ों में ऐसा विवरण उपलब्ध नहीं है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि यह गति बनी रहती है, तो जम्मू-कश्मीर में वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों को और सुदृढ़ किया जा सकता है, जिससे शेष गैर-साक्षरों को भी कवर किया जा सके। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग आगे कितनी प्रभावी ढंग से कार्यक्रम को लागू करते हैं।
यदि अन्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी इसी मॉडल का अनुसरण करते हैं, तो राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता दर में सुधार की संभावना है। लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य व्यावहारिक रूप से अप्राप्य माना जाता है, इसलिए भविष्य में भी 95 प्रतिशत से अधिक साक्षरता दर बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
स्रोत: newindianexpress.com



