मुख्य तथ्य
- मामला
- मेगा डीएससी-2025 शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका
- अदालत
- आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
- सुनवाई की तारीख
- मंगलवार, 4 अगस्त 2026
- अगली सुनवाई
- तीन सप्ताह बाद
- खेल कोटा आरक्षण
- 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत
- प्रवेश परीक्षा की आवश्यकता
- हटाई गई
पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को मेगा डीएससी-2025 शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई शुरू की।
याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता एस. श्रीराम सुब्रह्मण्यम ने अदालत से पूरी भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच का आदेश देने का अनुरोध किया।
उन्होंने तर्क दिया कि कथित अनियमितताएं अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि भर्ती की निष्पक्षता और अखंडता को प्रभावित करने वाली प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करती हैं।
वर्तमान स्थिति
सुनवाई के दौरान, अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सरकार ने मेगा डीएससी-2025 अधिसूचना जारी करने से ठीक पहले खेल कोटा नीति में बड़े बदलाव किए। उन्होंने बताया कि खेल कोटा के तहत आरक्षण 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया और प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आवश्यकता को हटा दिया गया।
अधिवक्ता ने कहा कि इन बदलावों से पूर्व निर्धारित समूह के उम्मीदवारों को लाभ हुआ और ये बदलाव पारदर्शिता के बिना किए गए। उन्होंने अदालत में नमूना प्रमाण पत्र पेश किए और तर्क दिया कि कुछ उम्मीदवारों ने मान्यता प्राप्त राज्य या राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के बजाय केवल स्थानीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया था।
अधिवक्ता ने बताया कि सरकार ने बाद में सार्वजनिक आलोचना के बाद खेल कोटा से संबंधित सरकारी आदेश वापस ले लिए। उन्होंने कहा कि इस वापसी से नीति में बदलावों पर गंभीर सवाल उठते हैं और स्वतंत्र जांच उचित है।
| पैरामीटर | पहले | बाद में |
|---|---|---|
| आरक्षण प्रतिशत | 2% | 3% |
| प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आवश्यकता | लागू | हटाई गई |
प्रभाव
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कई प्रभावित उम्मीदवारों ने कानूनी कार्रवाई और डर के कारण अदालत का रुख नहीं किया है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकारी संचार ने भर्ती प्रक्रिया से संबंधित आरोपों के प्रकाशन को हतोत्साहित किया।
वकील ने कहा कि यह मुद्दा हजारों शिक्षक आकांक्षियों को प्रभावित करता है, इसलिए यह जनहित में दायर की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि व्यक्तिगत याचिकाएं व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान कर सकती हैं, लेकिन केवल एक जनहित याचिका ही भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रणालीगत मुद्दों की जांच की मांग कर सकती है।
आगे की संभावना
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले को तीन सप्ताह बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। यदि अदालत सीबीआई जांच का आदेश देती है, तो भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता की जांच हो सकती है।
यदि अदालत याचिका खारिज करती है, तो प्रभावित उम्मीदवारों के पास अन्य कानूनी विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत क्या फैसला सुनाएगी, लेकिन मामले की अगली सुनवाई में और स्पष्टता आ सकती है।
स्रोत: prokerala.com



