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असम के शिवसागर में बाढ़ से बेघर परिवार, अस्थायी तंबुओं में गुजर-बसर

19 जुलाई को आई अचानक बाढ़ ने शिवसागर जिले के कई परिवारों को बर्बाद कर दिया। 300 से अधिक परिवार ऊंची जमीन पर तंबुओं में रह रहे हैं। पीड़ितों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

असम के शिवसागर में बाढ़ से बेघर परिवार, अस्थायी तंबुओं में गुजर-बसर
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

बाढ़ की तारीख
19 जुलाई
प्रभावित क्षेत्र
बिहुबोर, नेपाली खुटी, बिहारी बस्ती, रेलवेघाट
विस्थापित परिवार
300 से अधिक
मौतें (असम)
89
स्रोत
ASDMA

पृष्ठभूमि

असम के शिवसागर जिले में 19 जुलाई को आई अचानक और भीषण बाढ़ ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया। बिहुबोर, नेपाली खुटी, बिहारी बस्ती और रेलवेघाट उन इलाकों में शामिल हैं जो इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

स्थानीय निवासी किरपन कुर्मी ने बताया कि 18 जुलाई से लगातार बारिश हो रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी बाढ़ आएगी। अचानक पानी घरों में घुस गया और सारा सामान बह गया।

वर्तमान स्थिति

बाढ़ के पानी में कमी आ गई है, लेकिन घरों के अंदर अभी भी मोटी परत में कीचड़ और गाद जमी हुई है। प्रभावित परिवार ऊंची जमीन पर बने अस्थायी तंबुओं में रह रहे हैं। किरपन कुर्मी और उनका परिवार बिहुबोर दैनिक बाजार के पास ऊंची जमीन पर तंबू बनाकर रह रहा है।

कुर्मी ने बताया कि वे 16-17 दिनों से वहां रह रहे हैं, उनके पास बिस्तर नहीं है और उन्हें पत्थरों पर सोना पड़ रहा है। उनकी पत्नी फगुनी कुर्मी ने कहा कि बाढ़ ने सब कुछ नष्ट कर दिया है और वे अब जीवन संघर्ष कर रहे हैं। इस इलाके में 300 से अधिक परिवार ऐसे ही तंबुओं में रह रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र और पीड़ितों के बयान
क्षेत्र पीड़ित मुख्य बात
बिहुबोर रेलवेघाटकिरपन कुर्मीपत्नी दो बार पानी में डूबी, सब कुछ बह गया
बिहुबोरनरेन रायघर पूरी तरह नष्ट, 53 साल में ऐसी बाढ़ नहीं देखी
बिहुबोर 2 नंबर क्वारीअंजलि कर्मकारपानी गर्दन तक, बच्चों को बचाया
बिहुबोरमैनी गोवालाकिताबें और प्रमाण पत्र खोए
बिहुबोरसीता गोवालाबच्चे बीमार, दिहाड़ी मजदूर
सभी जानकारी ANI की रिपोर्ट से ली गई है।

प्रभाव

बाढ़ ने कई परिवारों की आजीविका छीन ली है। किरपन कुर्मी, जो एक आंख से दिखाई नहीं देते, दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करके अपने बेटे को पढ़ाते थे। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए जो कुछ भी बचाया था, वह सब बह गया। अब उनके पास फिर से बनाने की ताकत नहीं है।

एक अन्य पीड़ित नरेन राय ने कहा कि बाढ़ ने उनका घर पूरी तरह नष्ट कर दिया। 53 वर्षीय राय ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी। अंजलि कर्मकार ने बताया कि जब पानी उनकी गर्दन तक आ गया, तो उनके पति ने बच्चों को कंधे पर उठाकर पास के एक घर की छत पर पहुंचाया। रात में नाव से वे यहां पहुंचे।

कक्षा 12 की छात्रा मैनी गोवाला ने कहा कि बाढ़ में उनकी किताबें और शिक्षा प्रमाण पत्र खो गए। सीता गोवाला ने बताया कि उनके बच्चे बीमार हैं, वह और उनकी मां भी बीमार हैं। वे दिहाड़ी मजदूर हैं और सब कुछ खो चुके हैं।

आगे की राह

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, असम में बाढ़ से अब तक 89 लोगों की जान जा चुकी है। प्रभावित परिवारों को अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कब तक तंबुओं में रहना होगा।

यदि सरकार समय पर मदद नहीं पहुंचाती है, तो इन परिवारों को और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अगर बारिश फिर से होती है, तो उन्हें और अधिक नुकसान होने की संभावना है। हालांकि, अगर राहत कार्य तेजी से होते हैं, तो वे धीरे-धीरे अपने जीवन को फिर से संवार सकते हैं।

स्रोत: nepalnational.com

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