मुख्य तथ्य
- विरोध प्रदर्शन
- जंतर मंतर पर छात्रों का विरोध, मांग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
- बेरोजगारी दर
- युवा बेरोजगारी समग्र दर से तीन गुना अधिक
- महिला बेरोजगारी
- महिलाओं में बेरोजगारी लगभग चार गुना अधिक
- शिक्षा बजट में कटौती
- पिछले बजट में ₹6,701 करोड़ की कमी
- सीयूईटी
- पांचवें साल में भी गड़बड़ियां जारी
पृष्ठभूमि
जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन को सत्तारूढ़ सरकार के 12 साल के शासनकाल की सबसे बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। प्रदर्शन की तात्कालिक वजह परीक्षा में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं थीं, लेकिन युवाओं में असंतोष इससे कहीं गहरा है।
भारत में दुनिया की सबसे युवा आबादी है, जिसे जनसांख्यिकीय लाभांश कहा जाता है। हालांकि, यह लाभांश तभी कारगर होगा जब युवाओं को रोजगार मिले। रिपोर्ट के अनुसार, युवा बेरोजगारी दर समग्र बेरोजगारी दर से तीन गुना अधिक है, और महिलाओं में यह लगभग चार गुना अधिक है। शहरी महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां लगभग पांच में से एक महिला को नौकरी नहीं मिल पा रही है।
वर्तमान स्थिति
शिक्षा पर सरकारी खर्च में लगातार गिरावट आई है। सरकार के अपने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 ने शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। पिछले बजट में शिक्षा के लिए आवंटित राशि में ₹6,701 करोड़ की कमी रही।
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) ने प्रवेश प्रक्रिया को बाधित किया है। सीयूईटी के पांचवें साल में भी गड़बड़ियां जारी हैं, जिससे शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू नहीं हो पाते। सीबीएसई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग जैसे बदलावों ने भी व्यवस्था को और जटिल बना दिया है।
| संकेतक | मान |
|---|---|
| युवा बेरोजगारी दर (15-29 वर्ष) | समग्र दर से 3 गुना अधिक |
| महिला बेरोजगारी दर | समग्र दर से लगभग 4 गुना अधिक |
| शहरी महिलाओं में बेरोजगारी | लगभग 5 में से 1 महिला |
| शिक्षा बजट में कमी | ₹6,701 करोड़ |
प्रभाव
शिक्षा पर खर्च घटने से सीटों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है, जबकि आवेदकों की संख्या बढ़ रही है। इससे औसत संस्थानों में भी दाखिला मुश्किल होता जा रहा है। छात्रों को सीयूईटी की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना पड़ रहा है, जिससे समग्र शिक्षण प्रभावित हो रहा है।
सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप की खबरें हैं, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। प्रदर्शन में महिला छात्रों की बड़ी संख्या इसलिए भी है क्योंकि महिला बेरोजगारी दर पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सरकार शिक्षा पर खर्च बढ़ाने और परीक्षा प्रणाली में सुधार करने में विफल रहती है, तो युवाओं में असंतोष और गहरा सकता है। इससे सामाजिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
अगर सरकार शिक्षा बजट में कटौती को वापस लेती है और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है, तो विश्वास बहाल हो सकता है। हालांकि, यह तभी संभव है जब सरकार युवाओं की आवाज सुनने को तैयार हो।
यदि आर्थिक विकास दर में सुधार होता है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, तो युवा बेरोजगारी की समस्या कम हो सकती है। लेकिन इसके लिए ठोस नीतिगत पहल की आवश्यकता होगी।
स्रोत: thehindu.com



